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दुनिया की सबसे पुरानी टैटू शैली परंपराएं

दुनियाभर में अलग-अलग तरह के टैटूज बनाए जाते हैं। कुछ देशों में इसे खुशी से गोदवाए जाते है, जबकि अन्य जगहो पर केवल कैदियों और दासो को चिन्हित करने के लिए उपयोग किया जाता है। गोदने की परंपरा का एक लंबा इतिहास रहा है, जिसमें गहरी आध्यात्मिकता और स्वतंत्र सांस्कृतिक शामिल होती है। जबकि आधुनिक समय में टैटू का एक बहुत ही लोकप्रिय और खूबसूरत शैली के रूप में माना जाता है। आजकल लोग टैटू को फैशन के लिए बनवाते हैं।

होरिमोनो/इच्ज़्ज़ुमी (जापान)

टैटू

 

जापानी टैटू परंपरा लगभग 5000 साल पुरानी है। जापान में आधुनिक बदलाव के कारण वहां के लोग पुरानी परंपराओं का पालन करते हैं। होरीमोनो एक पसंदीदा नाम है, जबकि इरेजुमी का मतलब स्याही और सजाने के सामान से संबंधित है। शुरुआती दिनों में कैदियों को दंडित करने के लिए सजा के रूप में टैटू का इस्तेमाल किया जाता था। लेकिन 18 वीं शताब्दी में टैटू एक सजावट के रूप में इस्तेमाल किया जाने लगा। जापान में याकूजा अपने टैटू डिजाइन के लिए बहुत प्रसिद्ध है।

टा मोको ( न्यूजीलैंड)

टैटू

 

टैटू बनाने की परंपरा माओरी लोगों के लिए काफी पुरानी है टा मोको संदेश भेजने के लिए बनाया गया है, ताकि व्यक्ति के वंश और कौशल की पहचान हो सके। टा मोको को शरीर और चेहरे के निचले हिस्से में बनवाया जाता था। जबकि महिलाएं केवल होंटों और थुड़ी के आसपास टैटू बनवाया जाती है। टैटू समारोह को एक पवित्र अनुष्ठान माना जाता है। टैटू बनाने के लिए छेनी का उपयोग किया जाता है, ताकि सतह  चिकनी ना हो और उसमें खाँचे ना  हो यह भव्य सांस्कृतिक की पहचान का एक हिस्सा है।

मेहंदी भारत

मेहंदी नाम का टैटू आर्ट बनाने का इतिहास लगभग 5000 साल पुराना है। भारत के प्रत्येक विशेष अवसर के लिए एक विशेष डिजाइन होता है। जिसका अलग मतलब निकलता है। सबसे महत्त्वपूर्ण अर्थ हिंदू दुल्हनों की मेहंदी का होता है। उनके डिजाइंस में प्रयुक्त पैटर्न स्वास्थ्य,कामुकता और समृद्धि के प्रतीकों का प्रतिनिधित्व करता है।

 

यह टैटू डिजाइन 2 सप्ताह तक लगा रहता है। जिसके बाद यह खुद ही छूटने लग जाता है। टैटू के डिजाइन को ज्यादा देर तक रखने के लिए नींबू का रस और चीनी के मिश्रण को मेहंदी लगे हुए स्थान पर लगाया जाता है। कुछ पारंपरिक डिजाइंस पर्यटकों को पेश किए जाते हैं, जिन्हें वे काफी पसंद आते हैं। यह सालियों दुनिया भर में मशहूर होते हैं।

 

टैटू

टैटू पोलिनेशिया

इन पारंपरिक सामोआन टैटू ने एक लंबा सफर तय किया और दुनिया भर में अपना नाम मशहुर किया है। इस शैली में महत्वपूर्ण लिंग अंतर है और हमेशा हाथ पर ही बनाया जाता है। पहले  टैटू बनवाना एक फास्ट प्रोसेस नहीं थी क्योंकि कभी-कभी इसे पूरा होने में कई कई हफ्तों या महीनो का समय लग जाता था।

 

इस  कौशल को पिता से पुत्र तक पारित किया गया है। ताकि परंपराओं को यूं ही बरकरार रखा जा सके। डिजाइन आमतौर पर कमर से नीचे स्थित होते हैं। यह टैटू महंगी थी और इसे अर्जित किया जाना मुश्कील था। या यह अक्सर तब होता है, जब कोई व्यक्ति समाज में एक नई भूमिका को चिन्हित करता था।

बर्बर ( मोरक्को)

टैटू

 

प्राचीन बर्बर टैटू एक मरती हुई परंपरा है, आजकल आधुनिक पीढ़ियां इसकी असामान्य शैली को बिल्कुल भी पसंद्वनहीं करती है, क्योंकि उन्हें इस तरह के टैटू बनाना बिल्कुल भी पसंद नहीं है। बता दूं, कि यह टैटू केवल बर्बर महिलाओं पर करवाया जाता था। खासकर उनके चेहरों पर, मोरक्को में बर्बर महिलाओं पर पहला टैटू तब बनवाया जाता था।

 

जब वह किशोरावस्था में पहुंचती थी। उनके ऊपर बनाया गया टैटू एक प्रतीक होता था, जो उनके इतिहास का प्रतिनिधित्व करते  थे। जैसे कि भालू के टैटू ताकत, बुरी नजर से बचाए और स्वभाव के लिए सुरक्षात्मक ताबीज के रूप में बनवाया जाता था। इसे सुंदरता का संकेत भी माना जाता था।

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