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टी बैग से बनाई गई चाय कई लोग पीना पसंद करते हैं और आज तो रेलवे इत्यादि में टी बैग चाय ही उपलब्ध होती है।  लेकिन क्या आप लोगों को इस बारे में जानकारी है, कि टी बैग में जब भी पानी डाला जाता है, तो यह टि के साथ-साथ 11.6 बिलियन माइक्रोप्लास्टिक पार्टिकल और 3.1 मिलियन नैनो प्लास्टिक पार्टिकल भी छोड़ता है।

 

मेरे ख्याल से इस बात की जानकारी ज्यादा लोगों को नहीं होगी, दरअसल कनाडा के मैकगिल यूनिवर्सिटी में एक रिसर्च के मुताबिक यह पाया गया, कि टीबैग हमारे सेहत के लिए बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है। इसलिए इसका इस्तेमाल करना अप्रत्यक्ष रूप से अपने स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों की खराबी का सबब बनता है।

 

टी बैग

 

ऐसे में यदि हम इन्हें कंपोस्ट के लिए इस्तेमाल करें तो पौधे को भी हानिकारक तत्व प्राप्त होंगे और इसी समस्या को देखते हुए असम की एक ‘द टी लीफ थ्योरी’ नामक चाय कंपनी ने अपनी तरह का एक नया और पहला टी डीप बनाया है। जिसकी पैकेजिंग इको फ्रेंडली है, क्योंकि यह पत्तों के द्वारा बनाई गई है। इस खास डीप को उन लोगों ने अपने ब्रांड नाम वुलह के अंतर्गत ट्रू डीप के नाम से लांच किया है।

 

बता दूं, कि इस टी बैग में दो कंप्रेसर पत्तियां और एक बड़ होते हैं, जिन्हें सिलैंडरिकल आकार दिया जाता है और प्राकृतिक तरीके से उत्पन्न हुए कपास के कच्चे धागे से बांधा जाता है। जिसका वजन करीब 2 ग्राम तक होता है। वैसे तो यह काफी मेहनत भरा कार्य है और इसी लिए इसमें रोजाना लगभग 40 महिलाएं पैकेजिंग का कार्य करती हैं।

 

सबसे अच्छी बात यह है, कि यहां चाय प्रोसेसिंग के सभी काम एक ही जगह होते हैं और आमतौर पर पत्तों को खेतों से चुनकर सुखाने और छंटाई के लिए दूसरी जगह पर भेजा जाता है और वहां से इन्हें पैकेजिंग के लिए भेजा जाता है और फिर इसे लोकल दुकानों के आसपास पहुंचने में लगभग कई हफ्ते लग जाते हैं। लेकिन मेरे यहां महिलाएं खेतों से पत्तियां लाती है इसे कंप्रेस करके पैक करती है और फिर इसे सीधे ग्राहकों को जाकर बचती है।

 

टी बैग

 

इससे पतियों की shelf-life बढ़ती है, क्योंकि ट्रांसपोर्टेशन कम होने से इसमे नमी नहीं आती। एक बार जब यह टी बैग ग्राहकों तक पहुंचती है, तो बस टि डीप को गर्म पानी में डालना होता है। कंप्रेस हुई पत्तियाँ 4 से 5 मिनट में खुल जाती है। स्वाद के आधार पर एक ही पैक को दो से तीन बार इस्तेमाल किया जा सकता है।

 

इसे देखने के बाद ग्राहकों से आश्चर्यजनक प्रतिक्रिया हमें देखने को मिली। ग्राहक एक ट्रू डीप को 4 कप के लिए भी इस्तेमाल करते हैं। हालांकि तीसरे और चौथे कप में जब इसे इस्तेमाल किया जाता है, तब लगभग 6 से 7 मिनट का समय लगता है। इससे हमारे उत्पाद पर लोगों का भरोसा बढ़ा है। बता दे की इसे मुख्यता पत्तियों को संरक्षित करने के लिए विकसित किया गया था, ताकि बिना किसी टूट-फूट के यह एक शुद्ध और ताजगी भरा चाय का कप बनाएं।

 

अंशुमन का कहना है, कि वुलह आपको कई अलग अलग वैरायटी के चाय ऑफर करते हैं जिसमें कुछ खास इस तरह से हैं फिल्दि ग्रीन (ग्रीन टी), फिल्दि वाइट (वाइट टि),  डर्टी डिटॉक्स (तुलसी के साथ ग्रीन टी), किलर इम्यूनिटी (तुलसी के साथ ब्लैक टी) और ब्रूटल कोंबो (सभी किस्मों के मिश्रण) इत्यादि।

 

दो दोस्त उपमन्यु और अंशुमन ने आपस में मिलकर असम से इस बिजनेस की शुरुआत की। बता दूं, कि इन दोनों दोस्त को 2010 में  दिल्ली के एक ऑफिस में कॉरपोरेट नौकरी मिली थी, जहां मार्केटिंग और फाइनेंस में 4 साल का कॉर्पोरेट अनुभव प्राप्त किया।

 

फिर दोनों दोस्त अंशुमन के पारिवारिक ऑप्टिकल व्यवसाय का विस्तार करने के लिए वापस आसाम आ गए और यहीं से इन दोनों में अपने नए बिजनेस की शुरुआत की। बता दूं कि दोनों दोस्तों ने 2015 में असम, दार्जिलिंग और मेघालय में काफी बड़े पैमाने पर यात्रा की और 15 किसानों के साथ टाईअप किया जो समान रूप से बेहतरीन चाय उगाने के लिए मशहूर थे।

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