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ठंड के मौसम में होती है खांसी, तो यह इलाज जरूरत अपनाए|


कई लोगों को सर्दियों के मौसम में सांस लेने में परेशानी आती है, जिससे ब्रोंकाइटिस बीमारी कहा जाता है। इस बीमारी से ग्रसित लोगों को ठंड के मौसम मे परेशानियां बढ़ने शुरू हो जाती है। खांसी में बलगम आना, सांस लेने में परेशानी होना, थकान, जकड़न जैसे लक्षण महसूस होने लग जाते हैं। इसीलिए आज हम ब्रोंकाइटिस नामक बीमारी के बारे में कुछ जानकारियां बताने वाला हूं। जिसे जानना काफी जरूरी है। ब्रोंकाइटिस बहुत ही आम बीमारी है और जिन लोगों को ब्रोंकाइटिस नामक बीमारी होती है, उनके लिए सर्दियां काटना काफी मुश्किल होता है। तो आइए जानते हैं, कि ब्रोंकाइटिस क्या है और ठंड बढ़ने से यह क्यों बढ़ जाता है।

खांसी


ब्रोंकाइटिस क्या है?

इस बीमारी में फेफड़ों तक ऑक्सीजन पहुंचाने वाली नली या ट्यूब में संक्रमण हो जाता है। जिसकी वजह से वह पूरी तरह से सूख जाता है। सूजने के कारण सांस लेने में समस्या उत्पन्न होती है और खांसी शुरू हो जाती है। इसके अलावा खांसी में ज्यादा बलगम हो जाते हैं ।

यह बीमारी अधिकतर धुए में काम करने वाले लोगों, बीड़ी या अधिक मात्रा में सिगरेट पीने वाले लोगों मर देखी जाती है। इस बीमारी के लक्षण अमूमन 3 से 5 महीनों के भीतर दिखने लग जाते हैं। इसमें छाती में जकड़न और खूब सारा बलगम बनने लगता है तथा सांस लेने पर सीटी जैसी आवाज आती है और खांसी में सफेद, हरे तथा पीले रंग का बलगम बनता है। कुछ मरीजों को तो बुखार, नाक में पानी आना, सर्दी तथा गले में खराश जैसी समस्याएं भी देखी जाती है। अधिकतर इस मरीज से पीड़ित लोगों को ठंड में परेशानियां बढ़ने लग जाती है।

ब्रोंकाइटिस की समस्या ठंड में ज्यादा क्यों बढ़ती है?


सर्दियों के दिनों में वायरल इनफेक्शन ज्यादा होने लगते हैं, जो स्वसन तंत्र यानी कि सांस लेने वाले अंगों को संक्रमित कर देते हैं और इसी वजह से सांस लेने में समस्याएं बढ़ने शुरू हो जाती है। जब भी मौसम में बदलाव आता है, तो यह दिक्कत है देखने को मिलने लगती है। जैसा कि अब तक आपने ब्रोंकाइटिस के कारणों को तो जान लिया। लेकिन अब इससे बचाव के लिए आपको क्या करना चाहिए वह भी जान लेते हैं।

 


ब्रोंकाइटिस में क्या नहीं करनी चाहिए?


यदि कोई ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारी से ग्रसित है, तो उन्हें बीड़ी या सिगरेट पीना बंद कर देना जरूरी है। यदि ऐसा नहीं करते हैं, तो इससे परेशानी बढ़ने लगती है। इसके अलावा इस बीमारी से पीड़ित लोगों को धुए में नहीं जाना चाहिए और यदि वे धुए की तरफ जाते हैं, तो उन्हें मास्क पहनना जरूरी है। कोविड-19 में खासकर इस बीमारी से ग्रसित लोगों को सामाजिक दूरी बनाए रखना चाहिए और मास्क पहनना चाहिए तथा ठंड के मौसम में गर्म कपड़े पहनना चाहिए।

जिस भी चीजों से एलर्जी हो, जैसे कि इमलि या खटाई उनसे दूर रहना चाहिए और तो और ठंड के मौसम में ठंडी चीजों का सेवन कम कर देना चाहिए और यदि ठंड के मौसम में कोई एक्सरसाइज करने के लिए बाहर जाता है। तो उसे अपने साथ दवाइयां ले कर जानी चाहिए और ठंड के मौसम में ज्यादा सुबह या देर रात तक बाहर नहीं रहना चाहिए। जब भी बाहर जाएं सूरज निकलने के बाद ही जाएं और ऊपर बताए गए लक्षण दिखने पर तुरंत ही Pulmonologist के पास जाना चाहिए।

 

खांसी


ब्रोंकाइटिस का इलाज|


यदि आपको सांस संबंधी समस्या है, तो आपको इनहेलर दिया जाएगा। इसमें बहुत ही कम मात्रा में दवाइयां शामिल होती हैं और यह सीधे फेफड़ों तक पहुंचती है। इनहेलर का असर तुरंत ही दिखने लगता है और इसका असर लंबे समय तक बरकरार रहता है। लंबे समय तक इसका असर दिखने का सबसे बड़ा वजह यह है, कि यह सीधे फेफड़ों में जाती है इनहेलर की कोई भी साइड इफेक्ट नहीं होती।

यदि आपको बलगम ज्यादा बनता है, तो Mucolytics दिया जाता है। इसका इस्तेमाल करने से बलगम बिल्कुल ही पतला हो जाता है और जल्द ही बाहर निकलने लगता है जब भी ज्यादा खांसी होती है या एलर्जी होती है। वैसे में डॉक्टर आपको एंटीवायरस और एंटी एलर्जी दे सकते हैं।

लेकिन यदि इस तरह की समस्या में वैक्सीन लगावा ले तो ज्यादा फायदा होता है। खासकर 18 से 65 साल के लोगों को इनफ्लुएंजा नामक वैक्सीन लगवा लेनी चाहिए। बता दूं कि इनफ्लुएंजा वैक्सीन साल में एक बार लगती है और यदि कोई व्यक्ति 65 वर्ष से ऊपर है, तो उसे Pneumococcal नामक वैक्सीन लगा सकते हैं। लेकिन बता दूं, कि यह वैक्सीन जिंदगी में केवल एक बार ही लगाया जाता है।

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