140 करोड़ की आबादी वाले इस देश ने क्रिकेट में कई महान खिलाड़ियों को विरासत में दिया है जो इस खेल को नयी ऊंचाई पर लेकर गए एवं टीम इंडिया को दुनिया में शिखर तक पंहुचाया, लेकिन भारत में ऐसे भी खिलाड़ी भी हुए हैं, जिनमें क्रिकेट की शानदार प्रतिभा रही लेकिन बदकिस्मती से उन्हें टीम इंडिया से कभी खेलने का मौका नहीं मिला. आइये ऐसे ही उन 5 खिलाड़ियों की बात करते हैं जो वास्तव में टीम इंडिया में खेलने के हकदार थे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका.

सितांशु कोटक

1990 के दौरान सितांशु कोटक जैसे खिलाड़ी ने सौराष्ट्र से डोमेस्टिक क्रिकेट खेलते हुए लोगों का दिल जीत लिया था. दिग्गज इन्हें रणजी में क्रिकेट का स्टाइलिश बल्लेबाज भी कहा गया, लेकिन बदकिस्मती टीम इंडिया के चयनकर्ताओं ने इन्हें टीम इंडिया में खेलने का मौका नहीं दिया.

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कोटक ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 130 मैच खेले हैं, 41.76 की औसत से 8000 से अधिक रन बनाये हैं साथ ही कोटक इन मैचों में 15 शतक एवं 55 अर्धशतक लगाने में कामयाब रहे.

मिथुन मनहास

मिथुन मनहास दिल्ली के लिए दस साल से भी ज्यादा समय तक रणजी खेलते रहे, जब 2008 के दौरान दिल्ली के कप्तान थे, तो इन्होने टीम को रणजी में टीम को आगे ले गये, लेकिन उस रणजी का सेमीफाइनल एवं फाइनल मैचों में गौतम गंभीर ने कप्तानी की. दिल्ली के इस कद्दावर खिलाड़ी ने रणजी में 8554 रन बनाये जो भारतीय इतिहास में चौथे सबसे ज्यादा रन हैं. मनहास उस दौर में अच्छा खेल रहे थे जब टीम में तेंदुलकर, लक्ष्मण, द्रविड़ एवं गांगुली जसी खिलाड़ी टीम का हिस्सा बने हुए थे, ऐसे दौर में उन्हें टीम इंडिया के लिए एक भी मैच खेलने का मौका न मिल सका.

पद्माकर शैवालकर

डोमेस्टिक लेवल पर भारत में मुंबई की टीम रणजी इतिहास में सबसे सफल टीम रही है, क्योंकि यह टीम अब तक 41 बार रणजी ट्रॉफी जीतने में कामयाब रही है. यदि आप किसी टीम के लिए 27 सीजन  खेलते हैं, तो सोचिये क्रिकेट स्तर कितना अच्छा रहा होगा.

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शैवालकर ने मुंबई के लिए रणजी के 27 सीजन खेल, शैवालकर ने 119 मैचों में 19 की औसत से 589 विकेट चटकाए, लेकिन बदकिस्मती से इस शानदार गेंदबाज को भी टीम इंडिया में मौका नहीं मिल सका, जबकि यह खिलाड़ी इस स्तर का हकदार था.

अमोल मजूमदार

अमोल मजूमदार सचिन और कांबली के समय के बल्लेबाज थे, जिन्होंने हैरिस शील्ड ट्रॉफी इन खिलाड़ियों के बाद बल्लेबाजी की थी, लेकिन बदकिस्मती से अमोल मजूमदार को हमेशा ही कम आंका गया. उन्हें टीम इंडिया में कॉल अप के लिए इंतज़ार करने को कहा गया लेकिन फैब फोर के कारण इन्हें कभी नहीं मिल सका.

मजूमदार ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 170 मैच खेले हैं, जिसमें इन्होने 30 शतकों के साथ 11671 रन बनाये. इन अच्छे आंकड़ों के बाद भी इस खिलाड़ी को कभी टीम इंडिया में मौका नहीं मिला सका.

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रजिंदर गोयल

यदि रजिंदर गोयल जैसे खिलाड़ी अन्य दशक में जन्मे होते तो यह सुनिश्चित था कि वो अंतरराष्ट्रीय टीम में खेल रहे होते, लेकिन दुर्भाग्यवश इनका जन्म महान स्पिन चौकड़ी के समय में हुआ था. गोयल ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट के 157 मैचों में 18.56 की औसत से 750 विकेट चटकाए थे, लेकिन इतनी शानदार काबिलियत के बावजूद भी टीम इंडिया ने इन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौका देने तक विचार नहीं किया.

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